मतदान के बाद तय हुआ इस गांव में नहीं खुलेगी शराब की ​दुकानें

मतदान के बाद तय हुआ इस गांव में नहीं खुलेगी शराब की ​दुकानें 

राजस्थान की राजधानी जयपुर में आमेर पंचायत का एक गांव रोजदा हमेशा के लिए शराब की बुराई से मुक्त हो गया है। यहां के ग्रामीणों ने मतदान कर साफ कर दिया है कि वे गांव में शराब की दुकान नहीं खुलने देना चाहते। 

हालांकि इसके लिए इन ग्रामीणों को लंबी लड़ाई भी लड़नी पड़ी। गांव में शराब के कारण आए दिन होने वालों झगड़ों और कई लोगों की मौतों के बाद इस गांव के युवाओं और महिलाओं ने तय किया कि वे यहां शराब की दुकानें नहीं खुलने देगी। 351 दिन धरना दिया गया। सरकार को ज्ञापन दिए लेकिन, कोई फायदा नहीं हुआ। आखिर नियमों का साहरा लिया और शराब बन्दी के लिए प्रक्रिया अपनाई गई। 

सरकार की ओर से यहां की जनता की ओर से पारित संकल्प के आधार पर 19 मार्च 2017 को मतदान कराया। इस मतदान में ग्रामीणों ने जोश के साथ हिस्सा लिया और शराब बन्दी के पक्ष में भारी मतदान कर अपनी मंशा जाहिर कर दी। 

जस्टिस फॉर छाबड़ा जी संपूर्ण शराब बंदी आन्दोलन की राष्ट्रीय अध्य्क्ष पूनम अंकुर छाबड़ा के अनुसार, रोजदा के 2581 मतदाताओ ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसमे 2269 मत शराब बंदी के पक्ष में मत डले। केवल 170 वोट ऐसे थें जो यहां शराब बन्दी के खिलाफ थे। राजस्थान का यह दूसरी ग्राम पंचायत है जहां शराब बन्दी लागू हुई है। इससे पहले ​राजसमंद की काछबली में शराब बन्दी के लिए मतदान हुआ था। 
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