पोस्‍को ई-बॉक्‍स के लिए राष्‍ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग सम्‍मानित

National Commission for Protection of Child Rights gets SKOCH Awards for POCSO e-Box 
नई दिल्ली। बच्चों में यौन शोषण (Sexual Abuse) की शिकायत दर्ज करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक ड्राप बॉक्स पोस्को ई—बॉक्स (POCSO e-box) डवलप करने के लिए राष्‍ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) को स्‍काच सिल्‍वर और स्‍काच आर्डर ऑफ मैरिट पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया है। 
यह पुरस्कार नई दिल्‍ली में हाल में आयोजित एक कार्यक्रम में इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में अपर सचिव अजय कुमार ने एनसीपीसीआर की अध्‍यक्ष स्‍तुति कक्‍कड़ को प्रदान किया। कार्यक्रम में टेक्‍नॉलोजी कंपनियों, सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रमों और अनुसंधान संगठनों ने भाग लिया। एनसीपीसीआर को यह पुरस्‍कार बाल यौन शोषण की शिकायत पंजीकृत करने के लिए इलेक्‍ट्रानिक ड्राप बॉक्‍स पोस्‍को ई-बॉक्‍स विकसित करने में प्रौद्योगिकी के उपयोग करने करने के लिए प्रदान किया गया है। इस अवसर पर कक्‍कड़ ने कहा कि बच्‍चों के मन में हमेशा के लिए बुरा भाव छोड़ने वाले घिनोने बाल यौन शोषण के खिलाफ हर किसी को खड़ा होना चाहिए। प्रतियोगिता में तीन हजार से अधिक प्रविष्टियां शामिल हुई और एनसीपीसीआर की परियोजना पोस्‍को  ई-बॉक्‍स को 30 सर्वोच्‍च प्रविष्टियों में से प्रथम चुना गया।

क्या है पोस्को ई—बॉक्स (what is pocso e box)


पोस्‍को ई-बॉक्‍स, एनसीपीसीआर द्वारा ​विकसित एक ऐसा प्लेटफार्म है जहां बाल यौन शोषण के शिकार बच्‍चों से ऑनलाइन शिकायत प्राप्‍त की जाती है। यह प्रणाली शिकायतकर्ता की गोपनीयता को बरकरार रखती है। एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत को विशेषज्ञों की टीम जांचती और यौन शोषण के शिकार बच्‍चे को परामर्श प्रदान करने के साथ कानूनी प्रक्रिया पालन करने संबंधी दिशा-निर्देश प्रदान करती है। 
पोस्को ई-बॉक्‍स में एक लघु एनीमेशन फिल्‍म द्वारा यौन शोषण के शिकार बच्‍चों को सहायताहीन या दिग्‍भ्रमित और बुरा ना समझने जैसा आश्‍वासन दिया जाता है। ई-बॉक्‍स के द्वारा चरणबद्ध रूप से आसानी से शिकायत दर्ज की जा सकती है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2007 में किए गए अध्‍ययन के अनुसार सर्वे किए गए बच्‍चों में से 53 प्रतिशत बच्‍चों ने अपने जीवनकाल में एक या अधिक बाल यौन शोषण sexual abuse का सामना किया था। अधिकतर मामलों में दोषी कोई पारिवारिक सदस्‍य/निकट का रिश्‍तेदार या जानने वाला व्‍यक्ति था। इस प्रकार के मामलों में सामान्‍य तौर पर बाल यौन शोषण के शिकार बच्‍चे ऐसी घटनाओं को दर्ज नहीं कराते।
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